कितने ही दुर्व्यसन और दुर्गुण मनुष्य समाज को खोखला करते है । सिगरेट, शराब आदि का प्रचलन परिवार में विरोधी वातावरण न रहने से ही पनपता है । सिख परिवार में तंबाकू और जैन परिवार में माँसाहार का प्रचलन प्रायः नहीं ही पाया जाता । इसमें व्यक्ति विशेष को श्रेय नहीं, वरन पूरे परिवार का दबाव काम करता है ।
अनैतिकताएँ और अपराधी दुष्प्रवृत्तियाँ रोकने के लिये पुलिस, कचहरी, जेल, कानून आदि का खर्चीला ढाँचा चल रहा है, इतने पर भी पतनोन्मुख प्रवाह में कोई कमी आती नहीं दीखती । यदि परिवार में अनीति को प्रश्रय न देने का प्रचलन हो, उसको समर्थन-सहयोग न मिले, तो अधिकांश दुष्प्रवृत्तियाँ पनपने का अवसर ही नहीं पा सकती । व्यक्तिगत दोष-दुर्गुणों से लेकर सामाजिक कुरीतियों और अनैतिक, अवांछनीय, भ्रष्ट प्रवृत्तियों तक जितनी भी समस्याएँ वैयक्तिक और सामाजिक जीवन में व्याप्त है, उनका हल परिवार में खोजा जा सकता है ।
अनैतिकताएँ और अपराधी दुष्प्रवृत्तियाँ रोकने के लिये पुलिस, कचहरी, जेल, कानून आदि का खर्चीला ढाँचा चल रहा है, इतने पर भी पतनोन्मुख प्रवाह में कोई कमी आती नहीं दीखती । यदि परिवार में अनीति को प्रश्रय न देने का प्रचलन हो, उसको समर्थन-सहयोग न मिले, तो अधिकांश दुष्प्रवृत्तियाँ पनपने का अवसर ही नहीं पा सकती । व्यक्तिगत दोष-दुर्गुणों से लेकर सामाजिक कुरीतियों और अनैतिक, अवांछनीय, भ्रष्ट प्रवृत्तियों तक जितनी भी समस्याएँ वैयक्तिक और सामाजिक जीवन में व्याप्त है, उनका हल परिवार में खोजा जा सकता है ।