सुबह सुबह हम अलार्म घड़ी को धता बता कर सो रहे थे की अचानक फोन की घंटी बज गयी.. वो घंटी तो फिर भी कुछ नही थी.. श्रीमती जी रसोई में से चाय बनाते बनाते बोली अजी इतनी सुबह हो गयी खुद नही उठते कम से कम फोन तो उठा लो.. और हमने उस कर्कश ध्वनि से बचने के लिए फोन उठाया.. सामने से आवाज़ आई.. एडिटर साहब है.. हमने कहा भय्ये लगता है तुम कोई ग़लत नंबर डायल कर दिए हो.. यहा एडिटर नाम की प्रजाति नही पाई जाती है.. उसने पूछा तो फिर आप कौन है.. मुझे थोड़ी देर सोचने के बाद याद आया.. मैने कहा जी मैं तो पति हु..पर आप कौन है.. उसने कहा आप सिर्फ़ पति है? हम बोले भइया शादी कर लो तुम भी सिर्फ़ पति ही रहोगे.. उसने कहा बकवास बंद करो और मेरी बात सुनो.. ये सुनते ही हमे तेश आ गया.. हम बोले जनाब अपनी ज़बान संभालिए इस तरह से हमारी श्रीमती जी के अलावा कोई हमसे बात नही कर सकता.. सामने से आवाज़ आई माफ़ कीजिए भाई साहब.. दरअसल किसी और का गुस्सा आप पे निकाल दिया.. हमने पूछा मगर इतनी सुबह सुबह इतना गुस्सा क्यो हो भाई.. इतना सुनते ही वो थोड़े गंभीर हो गये बोले मैं तो परेशान हो गया हु.. ये साले एडिटर लोग खुद को समझते क्या है.. जो मर्ज़ी आए लिख देते है.. बर्दास्त करते करते उमरा बीत गयी है.. अभी एक किताब पढ़ रहा था.. सात राजकुमार.. इसमे साले राजा की बीमारी दूर करने के लिए हिमालय से जड़ी बूटी लानी थी तो सारे राजकुमार गये.. और साले बड़े बेटे जो थे एक एक करके गये और सौरव गॅंगली की तरह वापस लौट आए..हमने कहा मतलब सौरव की तरह टीम में वापस आ गये.. वो बोले आदमी हो या ढक्कन.. बेटिंग करने गये और जाते ही वापस पॅवलियन में आ गये.. अब बीच में टोकना मत और सुनो... एक एक करके छ: राज कुमार तो खाली हाथ आ गये लेकिन सबसे छोटा राजकुमार ले के आ गया जड़ी बूटी.. अब यार ये कोई बात हुई जब देखो तब छोटा छोटा.. राजा की तीन रानिया हो तो हमेशा ये छोटी रानी ही क्यो बुद्धिमान और सुंदर होती है.. सारे बेटो में छोटा ही लायक होता है.. हमने सोचा बात तो ससुरे ने बिल्कुल ठीक कही है.. हमे बचपन में हमारे पिताजी की याद आ गयी.. हमारे चप्पल जब भी जल्दी घिसते थे तो पिताजी कहते इतनी जल्दी घिस गये.. देख छोटे को वो कैसे चलता है तू हमेशा लल्लू ही रहेगा..
वो बोला अरे श्रीमान इतना ही नही.. ये तो हम बर्दास्त भी कर ले पर अमा ये कोई बात हुई की जादूगर रहता यहा है और उसकी जान सात समुंदर पार वाली काली पहाड़ी की लाल घाटी में सोने के पिंजरे में बैठे नीले तोते में है.. लोगो को अपने काले खाते तो सात समुंदर पार खुलवाते देखा था उनका पैसा तो वही रहता है पर जान कोई कैसे रख सकता है.. इस बात से मैं सहमत नही हुआ क्योंकि मेरी जान भी तो नुक्कड़ वाले मकान पर रहती थी.. वो बात अलग है की मेरी कभी उससे जान पहचान नही हुई.. वो बोला अरे और क्या बताऊ साहब इन राजाओ का तो क्या कहना कोई बंदा तलवारबाजी में जीत क्या गया बेटी की शादी उससे करवा देते है.. अमा यार तुम्हारी बेटी की कोई वेल्यू नही है क्या?.. राजा की बेटी है थोड़ा तो स्टॅंडर्ड मैंटेन करो.. हम बोले ये तो तुम ठीक कह रहे हो जब हमारी शादी की बात थी तो श्रीमती जी के पिताजी हमारे पिताजी के साडू की भाभी के मामा की ताई की ननद के पास में रहने वाले मिश्रा जी के बेटे से पूछ आए थी की बंदे का कैरेक्टर कैसा है.. फिर वो तो राजा की बेटी है..वो बोला और नही तो क्या.. लेकिन किताबो में चलता था तब तक तो ठीक था.. अब तो ये आम ज़िंदगी में होने लग गया तो हमसे सहा नही गया.. हम बोले आम ज़िंदगी में.. क्यू क्या हुआ... उसने कहा देखिए आई पी एल के मैच में जितने भी बड़े खिलाड़ी थे, बड़ी टीम थी वो तो कुछ कर नही पाए.. छोटे खिलाड़ी और छोटी टीमे जीत रही है... बड़ी कार् के होते हुए छोटी छोटी कारे बन रही है.. गोया की छोटे लोग भी अब कारो में बैठेंगे ये बात बड़े लोगो को हज़म नही हो रही है और हम ठहरे बड़े लोगो के स्पून... तो हमारा काम है एडिटर को पकड़ना और धमकाना की उल जुलूल लिखना बंद करो.. तुम्हारे छोटे लेख पढ़कर छोटे लोगो को हिम्मत मिल रही है.. बड़े बन रहे है.. लिखना बंद कर दो वरना प्रेस बंद करवा देंगे.. नही तो तुम्हारी टाँगे तोड देंगे.. टांगे टूटने की बात सुनकर हम सहम गये.. हम बोले लेकिन आप ये सब मुझे क्यो कह रहे है भइया.. मैं तो आपके छोटे भाई जैसा हू.. इतना सुनते ही उसे गुस्सा आ गया.. उसने फोन हमारे मुँह पर मारा और बोला कहाँ फोन मिला दिया.. साला! छोटा कही का..
वो बोला अरे श्रीमान इतना ही नही.. ये तो हम बर्दास्त भी कर ले पर अमा ये कोई बात हुई की जादूगर रहता यहा है और उसकी जान सात समुंदर पार वाली काली पहाड़ी की लाल घाटी में सोने के पिंजरे में बैठे नीले तोते में है.. लोगो को अपने काले खाते तो सात समुंदर पार खुलवाते देखा था उनका पैसा तो वही रहता है पर जान कोई कैसे रख सकता है.. इस बात से मैं सहमत नही हुआ क्योंकि मेरी जान भी तो नुक्कड़ वाले मकान पर रहती थी.. वो बात अलग है की मेरी कभी उससे जान पहचान नही हुई.. वो बोला अरे और क्या बताऊ साहब इन राजाओ का तो क्या कहना कोई बंदा तलवारबाजी में जीत क्या गया बेटी की शादी उससे करवा देते है.. अमा यार तुम्हारी बेटी की कोई वेल्यू नही है क्या?.. राजा की बेटी है थोड़ा तो स्टॅंडर्ड मैंटेन करो.. हम बोले ये तो तुम ठीक कह रहे हो जब हमारी शादी की बात थी तो श्रीमती जी के पिताजी हमारे पिताजी के साडू की भाभी के मामा की ताई की ननद के पास में रहने वाले मिश्रा जी के बेटे से पूछ आए थी की बंदे का कैरेक्टर कैसा है.. फिर वो तो राजा की बेटी है..वो बोला और नही तो क्या.. लेकिन किताबो में चलता था तब तक तो ठीक था.. अब तो ये आम ज़िंदगी में होने लग गया तो हमसे सहा नही गया.. हम बोले आम ज़िंदगी में.. क्यू क्या हुआ... उसने कहा देखिए आई पी एल के मैच में जितने भी बड़े खिलाड़ी थे, बड़ी टीम थी वो तो कुछ कर नही पाए.. छोटे खिलाड़ी और छोटी टीमे जीत रही है... बड़ी कार् के होते हुए छोटी छोटी कारे बन रही है.. गोया की छोटे लोग भी अब कारो में बैठेंगे ये बात बड़े लोगो को हज़म नही हो रही है और हम ठहरे बड़े लोगो के स्पून... तो हमारा काम है एडिटर को पकड़ना और धमकाना की उल जुलूल लिखना बंद करो.. तुम्हारे छोटे लेख पढ़कर छोटे लोगो को हिम्मत मिल रही है.. बड़े बन रहे है.. लिखना बंद कर दो वरना प्रेस बंद करवा देंगे.. नही तो तुम्हारी टाँगे तोड देंगे.. टांगे टूटने की बात सुनकर हम सहम गये.. हम बोले लेकिन आप ये सब मुझे क्यो कह रहे है भइया.. मैं तो आपके छोटे भाई जैसा हू.. इतना सुनते ही उसे गुस्सा आ गया.. उसने फोन हमारे मुँह पर मारा और बोला कहाँ फोन मिला दिया.. साला! छोटा कही का..
