बरसों पहले हम जुदा हुए उनसे
फ़िर न मिलने की कसम खा कर
सालों बाद भरी महफ़िल
जो नजरे टकराई फ़िर उन्ही से जाकर
हम उन्हें देखते रहे, वो हमें
दस्तक देने लगी यादें जब कई आकर
वो अश्क जो उन्होंने
छत पर जाने तक रखा बचाकर
सुना है अब लोग उसे चाँद कहा करतें हैं
फ़िर न मिलने की कसम खा कर
सालों बाद भरी महफ़िल
जो नजरे टकराई फ़िर उन्ही से जाकर
हम उन्हें देखते रहे, वो हमें
दस्तक देने लगी यादें जब कई आकर
वो अश्क जो उन्होंने
छत पर जाने तक रखा बचाकर
सुना है अब लोग उसे चाँद कहा करतें हैं